डॉ.चन्द्रपाल राजभर राष्ट्रीय शिक्षक रत्न सम्मान एंव हिन्दी सेवा सम्मान से हुए अलंकृत
सुल्तानपुर। जनपद सुल्तानपुर का गौरव बढ़ाने वाले चित्रकार, लेखक, शिक्षक को आगरा में कल आयोजित हुए ‘हमारी संस्कृति हमारी पहचान’ राष्ट्रीय शैक्षिक कार्यशाला, पुस्तक लोकार्पण एवं शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा, साहित्य, कला एवं सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. चन्द्रपाल राजभर को राष्ट्रीय शिक्षक रत्न सम्मान एवं हिन्दी सेवा सम्मान से अलंकृत किया गया। यह सम्मान उन्हें उत्तर प्रदेश शासन के उच्च शिक्षा मंत्री माननीय योगेंद्र उपाध्याय, आयुष विभाग के राज्य मंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, पूर्व सांसद एवं राष्ट्रीय कवि ओमपाल सिंह ‘नीडर’, आगरा डायट के प्रवक्ता मनोज वाष्र्णेय तथा डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के ललित कला, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. लवकुश मिश्रा द्वारा प्रदान किया गया। यह कार्यक्रम तारक सेवा संस्था, बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में शिक्षा और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष जोर दिया गया। समारोह में शिक्षकों, साहित्यकारों, कलाकारों एवं विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रतिभावान व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। डॉ. चन्द्रपाल राजभर शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ-साथ साहित्य, संस्कृति, कला, पर्यावरण, शोध एवं नवाचार, अध्यात्म तथा मानवता के क्षेत्र में भी निरंतर सक्रिय रहते हैं। उनके लेखन, पुस्तक सृजन, कला-साधना और समाज के प्रति समर्पित कार्यों को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक रत्न सम्मान एंव हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया। वहीं सम्मान समारोह में वक्ताओं ने कहा कि एक शिक्षक की भूमिका केवल बच्चों को पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के भविष्य को दिशा देने का कार्य करता है। जब शिक्षक शिक्षा के साथ साहित्य, कला, संस्कृति और सामाजिक चेतना से जुड़ता है, तो उसके प्रयास का प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है। यह कार्यक्रम डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय आगरा के सभागार में आयोजित किया गया।
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