सीमांकन के बाद भी भूमि पर नहीं मिला कब्जा, कानूनगो पर ₹10 हजार लेने का आरोप
बाजार शुक्ल, अमेठी। थाना बाजार शुक्ल परिसर में शनिवार को आयोजित थाना समाधान दिवस में राजस्व विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया। ग्राम पाली, परगना जगदीशपुर निवासी नंदलाल पुत्र राम आसरे ने कानूनगो शत्रुघ्न सिंह पर ₹10 हजार रिश्वत लेने सहित गंभीर आरोप लगाते हुए नायब तहसीलदार ज्योति पांडेय के समक्ष शिकायत दर्ज कराई।
शिकायतकर्ता के अनुसार, हकबरारी से संबंधित विवाद में राजस्व विभाग द्वारा उसकी भूमि का सीमांकन कराया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद उसे सीमांकित भूमि पर कब्जा नहीं मिल सका है। नंदलाल का कहना है कि उसने पूर्व में उपजिलाधिकारी मुसाफिरखाना को प्रार्थना पत्र देकर विपक्षियों द्वारा भूमि पर कब्जे के प्रयास की शिकायत की थी।
शिकायत के बाद राजस्व विभाग की ओर से गाटा संख्या 2173, रकबा 0.365 हेक्टेयर भूमि का सीमांकन कराया गया।शिकायतकर्ता का कहना है कि सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब उसे मौके पर कब्जा दिलाने के लिए पुलिस बल की आवश्यकता है। उसने राजस्व निरीक्षक को पुलिस बल के साथ मौके पर भेजकर सीमांकित भूमि पर कब्जा दिलाने की मांग की है।
मामले में सबसे गंभीर आरोप कानूनगो शत्रुघ्न सिंह पर ₹10 हजार रिश्वत लेने का लगाया गया है। हालांकि, रिश्वत लेने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसकी वास्तविकता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, आरोपों के घेरे में आए कानूनगो शत्रुघ्न सिंह ने रिश्वत लेने के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि संबंधित व्यक्ति के प्रार्थना पत्र पर नियमानुसार कार्रवाई की गई है और भूमि का सीमांकन भी कराया जा चुका है। उनके स्तर से सभी कार्रवाई नियमानुसार की गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी मुसाफिरखाना नितेश राज से दूरभाष के माध्यम से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। खबर लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से रिश्वत के आरोपों अथवा शिकायत पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। अब सवाल यह है कि सीमांकन के बाद भी फरियादी को कब्जा क्यों नहीं मिल सका और लगाए गए रिश्वत के आरोपों में कितनी सच्चाई है? शिकायत के बाद मामले की निष्पक्ष जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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