गौस-ए-पाक की सीरत का पैगाम लेकर निकला जुलूस-ए-गौसिया, सच और इंसानियत की राह पर चलने का दिया संदेश
लंभुआ। ग्यारहवीं शरीफ के मुबारक मौके पर कस्बा लंभुआ में जुलूस-ए-गौसिया पूरी अकीदत, जोश और भाईचारे के माहौल में निकाला गया। जामा मस्जिद गौसिया से निकले इस जुलूस की सरपरस्ती मौलाना महमूद रज़वी काज़िए शरा सुल्तानपुर ने की, जबकि कयादत मुफ्ती अकील अहमद मिस्बाही रौनाही ने की। जुलूस कस्बे के प्रमुख मार्गों से होता हुआ ब्लॉक रोड स्थित एचएमआईए हायर सेकेंडरी स्कूल, रज़ा नगर पहुंचा। जुलूस के दौरान “जश्ने गौसुल वरा जिंदाबाद”, “ग्यारहवीं शरीफ जिंदाबाद” और “या गौस” के नारों से पूरा कस्बा गूंजता रहा। विभिन्न अंजुमनों ने शिरकत कर गौस-ए-पाक शेख अब्दुल कादिर जिलानी की शान में मनकबत पेश की। कार्यक्रम में धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक सौहार्द और इंसानियत का संदेश भी प्रमुखता से सामने आया। स्कूल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में अंजुमनों, उलमा-ए-किराम, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। हिंदू-मुस्लिम एकता के अध्यक्ष सुशील बरनवाल और नगर पंचायत अध्यक्ष अवनीश सिंह ‘अंगद’ ने अंजुमनों को इनाम देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम के आयोजक गुलाम दस्तगीर कादरी ने आयोजन की सफलता में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताते हुए कहा कि गौस-ए-पाक की तालीम सिर्फ धार्मिक रस्म तक सीमित नहीं, बल्कि इंसानियत, सच्चाई और समाज में भाईचारा कायम रखने का संदेश देती है। वहीं मुफ्ती अकील अहमद मिस्बाही ने कहा कि गौस-ए-पाक की जिंदगी से सबसे बड़ी सीख सच्चाई और नेक रास्ते पर कायम रहने की है, इसलिए किसी भी परिस्थिति में झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। उन्होंने लोगों से अमन, भाईचारे और इंसानियत को मजबूत करने का आह्वान किया। इस मौके पर मौलाना अकबर अली, मौलाना गुलाम रब्बानी, अब्दुल कादिर प्रतापगढ़ी, कारी मोहम्मद शफीक, मौलाना अब्दुल हाफिज, सिराजुद्दीन सिद्दीकी, सय्यद इस्लाम अली लल्लन, खुर्शीद फारूकी, सद्दाम सब्बाग, असगर फारूकी, राशिद इदरीसी, मुहम्मद आदिल, सलीम अंसारी, हामिद हुसैन, कलीम इदरीसी, गुलाम गौस, वाजिद हुसैन, सरफराज अहमद सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। हजारों की भीड़ की मौजूदगी में कार्यक्रम के समापन पर सामूहिक दुआ हुई, जिसमें मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली और आपसी भाईचारे की दुआ मांगी गई।
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