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चंदनिया डीह दुर्गा मंदिर: 250 वर्षों से आस्था का केंद्र

चंदनिया डीह दुर्गा मंदिर: 250 वर्षों से आस्था का केंद्र

केएमबी ब्यूरो मुकुल बरनवाल
सीवान। मैरवा रेलवे स्टेशन से उत्तर लगभग 200 मीटर की दूरी पर स्थित चंदनिया डीह दुर्गा मंदिर जिले का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। करीब 250 वर्ष पुराने इस मंदिर में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है, जबकि नवरात्र के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है। मंदिर परिसर में मां दुर्गा के साथ भगवान हनुमान की प्रतिमा भी स्थापित है।
नवरात्र के दौरान कलश स्थापना के साथ ‘दुर्गा सप्तशती’ का पाठ किया जाता है। महाष्टमी की रात आयोजित होने वाली निशा पूजा यहां की प्रमुख परंपरा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है।
मंदिर के पुजारी विंध्याचल प्रसाद का कहना है कि प्राचीन काल में यहां एक इमली का वृक्ष था, जिसकी पूजा की जाती थी। अंग्रेजी शासनकाल में यहां एक डाक बंगला भी बनाया गया, लेकिन मंदिर का विस्तार उस समय नहीं हो सका। स्वतंत्रता के बाद धीरे-धीरे इस स्थल की ख्याति बढ़ती गई।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान कभी 16 बीघा का गढ़ था। दंतकथाओं में सहदेव चौधरी और उनकी पुत्री चंदा की कथा प्रचलित है, जिसके कारण इस स्थान का नाम चंदनिया डीह पड़ा। कहा जाता है कि चंदा ने अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए अपने प्राण त्याग दिए थे और बाद में एक पुजारी को स्वप्न में दर्शन देकर मंदिर स्थापना का निर्देश दिया।
आज भी नवरात्र के दौरान हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर में मन्नत पूरी होने की आस्था के चलते सैकड़ों जोड़े यहां विवाह बंधन में भी बंधते हैं, जिससे इस मंदिर की धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।

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