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जनसुनवाई शिकायत के निस्तारण पर सवाल, सार्वजनिक भूमि पर कब्जे का मामला गरमाया, जांच प्रक्रिया को लेकर उठे प्रश्न

जनसुनवाई शिकायत के निस्तारण पर सवाल, सार्वजनिक भूमि पर कब्जे का मामला गरमाया, जांच प्रक्रिया को लेकर उठे प्रश्न

केएमबी खुर्शीद अहमद
तिलोई,अमेठी। मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज एक शिकायत के निस्तारण को लेकर जनपद में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। पूरा मामला ग्राम सभा की सार्वजनिक भूमि (खसरा संख्या 278, खाद गड्ढा भूमि) से कथित अवैध कब्जा हटाने से जुड़ा है। शिकायत संख्या 40020326001572, दिनांक 16 जनवरी 2026 को दर्ज की गई थी।शिकायतकर्ता अंकित कुमार त्रिवेदी, निवासी पुरे चौबे,ग्राम पंचायत रामपुर पंवारा, विकासखंड सिंहपुर, तहसील तिलोई, जनपद अमेठी, ने आरोप लगाया है कि शिकायत में अवैध कब्जाधारियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई और सरकारी मुकदमा दर्ज करने की मांग गई थी। उनका कहना है कि मामले में मौके का समुचित निरीक्षण किए बिना निस्तारण संबंधी टिप्पणी दर्ज कर दी गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि निरीक्षण के दौरान उन्हें उपस्थित नहीं किया गया और न ही वास्तविक स्थिति का विधिवत मापन कराया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार पुनः आपत्ति दर्ज किए जाने के बाद 28 फरवरी को प्रस्तुत रिपोर्ट में क्षेत्रीय विवरण को लेकर भी विसंगति सामने आई। उनका आरोप है कि संबंधित क्षेत्र के स्थान पर गौरीगंज विधानसभा के जामों विकास खण्ड क्षेत्र के सूखी बाजगढ़ का विवरण दर्शाया गया, जिससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न उठे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी है।उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार द्वारा जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से त्वरित एवं पारदर्शी निस्तारण का दावा किया जाता रहा है। ऐसे में यदि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही होती है तो यह व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, मौके का पुनः सत्यापन वीडियोग्राफी के साथ कराया जाए तथा अवैध कब्जा पाए जाने पर उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए। साथ ही यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस प्रकरण में क्या रुख अपनाता है और शिकायतकर्ता को कब तक स्पष्ट जवाब मिलता?

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