शासकीय महाविद्यालय बिछुआ में पर्यावरणीय परिवर्तन एवं सतत विकास पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ
सिवनी। शासकीय महाविद्यालय बिछुआ में “पर्यावरणीय परिवर्तन, संसाधन प्रबंधन एवं सतत विकास: विकसित भारत 2047 की रूपरेखा” विषय पर द्वि-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ आज भव्य रूप से हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व विधायक चौरई विधानसभा क्षेत्र पं. रमेश दुबे रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ हरिसिंग गौर विश्वविद्यालय सागर के पूर्व प्राध्यापक एवं भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एस. के. शर्मा ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ सर्वप्रथम स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा के अनावरण के साथ हुआ। इसके पश्चात नवीन व्याख्यान कक्ष का फीता काटकर उदघाटन किया गया। तत्पश्चात सरस्वती वंदना, पूजन एवं अतिथियों का स्वागत संपन्न हुआ। इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग जबलपुर संभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ पी आर चंदेलकर, डॉ एलिना अलकिना रूस, प्रो व्ही सी वैद्य जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली।
डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर से प्रो एस के शुक्ला, प्रो जे एल जैन, डॉ सुषमा शुक्ला एवं कलकत्ता विश्वविद्यालय कोलकाता से प्रो एल एन सतपती, एरिक ऑस्ट्रिया एवं छिंदवाड़ा महाविद्यालय प्राचार्य डॉ लक्ष्मीचंद रहे। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर. पी. यादव ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सहित सभी विशिष्ट अतिथियों ने अपने उद्बोधन में पर्यावरणीय संरक्षण, संसाधनों के समुचित उपयोग एवं सतत विकास की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य वक्तव्य सत्र में डॉ. एस. के. शर्मा, डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर ने पर्यावरण, जल संरक्षण तथा सम्मेलन के उद्देश्यों पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित जनों को नई दिशा प्रदान की।
प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. पी. मसिलामणि ने रिमोट सेंसिंग एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली विषय पर अपना व्याख्यान दिया, जिसे प्रतिभागियों द्वारा अत्यंत सराहा गया। दूसरे वक्ता मिस डियोनेसिया, ग्रीस ने अपने उद्बोधन में जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में सहयोग और ध्यान (मेडिटेशन) के महत्व पर विशेष बल दिया। द्वितीय तकनीकी सत्र में एलिना अलकिना रूस ने अपने वक्तव्य में कहा सहजयोग अपनाने से महिलाओं में आत्मविश्वास, मानसिक संतुलन एवं जागरूकता का विकास होता है। इससे वे सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक रूप से सशक्त बनकर समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम होती हैं। प्रो व्ही सी वैद्य जेएनयू नई दिल्ली ने समग्र तकनीक सत्रों को समापन मुख्य बिंदुओं के सार प्रस्तुत करके किया। इसके पश्चात तृतीय तकनीकी सत्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रो एल एन सतपती ने भारत के स्थानिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का मानचित्रण पर अपने विचार व्यक्त किए । अंत में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
Post a Comment