अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन जलवायु परिवर्तन एवं ध्यान आधारित दृष्टिकोणों पर मंथन
विधायक सुजीत सिंह चौधरी की गरिमामयी उपस्थिति में विविध तकनीकी सत्र आयोजित
छिंदवाड़ा। शासकीय महाविद्यालय बिछुआ में पर्यावरणीय परिवर्तन, संसाधन प्रबंधन एवं सतत विकास: विकसित भारत 2047 स्थानीय महाविद्यालय में आयोजित द्वि-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक श्री सुजीत सिंह चौधरी की गरिमामयी उपस्थिति में सरस्वती पूजन के साथ हुआ।
प्रथम तकनीकी सत्र में जर्मनी से पधारी अन्नामराई, जर्मन भाषा शिक्षिका एवं प्रेरक वक्ता, ने आत्मसाक्षात्कार एवं दिव्य शक्ति को पर्यावरणीय चेतना से जोड़ते हुए अपने विचार प्रस्तुत किए। इसके पश्चात ऑस्ट्रिया से आए एरिक ने सहजयोग के माध्यम से पर्यावरण संतुलन पर प्रभावशाली व्याख्यान दिया।अगले वक्ता के रूप में डॉ. सुषमा शुक्ला, डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर ने मूलाधार चक्र एवं कुंडलिनी जागरण के संदर्भ में अपने विचार साझा किए। लेबनान की लेबनीस विश्वविद्यालय की प्रोफेसर सुश्री डॉ हाला सुकरियेक ने कृषि में ध्यान एवं उत्पादकता के संबंध पर महत्वपूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत किया।
कोलकाता विश्वविद्यालय की डॉ. प्रियंका चटर्जी ने तमिलनाडु के धनुषकोडी तटीय क्षेत्र में पर्यावरणीय भेद्यता, पुनर्वास जोखिम एवं आजीविका परिवर्तन पर शोधपरक प्रस्तुति दी। इसके पश्चात डॉ. अन्वेशा हल्दर ने निम्न गंगा डेल्टा में पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से पेलियोचैनल आर्द्रभूमि की प्राकृतिक विरासत के रूप में मान्यता पर अपने विचार व्यक्त किए। सत्र के अंत में प्रो. एच. एस. शर्मा ने राजस्थान के संदर्भ में भारत में जलवायु परिवर्तन विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान दिया। तकनीकी सत्र का निष्कर्ष प्रो. सतपति एवं प्रो. जे. एल. जैन द्वारा प्रस्तुत किया गया।
द्वितीय तकनीकी सत्र में डॉ एस के शुक्ला डॉ हरिसिंग गौर विश्वविद्यालय सागर ने पर्यावरणीय चिंतन एवं समाधान पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। साथ ही देश के कोने कोने से शोधार्थियों ने ऑनलाइन शोध पत्र प्रस्तुत किया। अंतिम समापन सत्र महाविद्यालय प्राचार्य डॉ आर पी यादव के स्वागत भाषण से प्रारंभ हुआ। उन्होंने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया । राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर आई पी त्रिपाठी के मुख्य आतिथ्य में अंतिम सत्र सम्पन्न हुआ। उन्होंने अपने उद्बोधन में पर्यावरणीय जन चेतना की बात कही और ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की प्रशंसा की। अंत में प्रमाण पत्र वितरण और आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।
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