जलसा शोहदा-ए-इस्लाम के 20वें वर्ष का हुआ शानदार आगाज़
सुल्तानपुर, 17 जून। जामिया इस्लामिया सुल्तानपुर में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध दीनी कार्यक्रम "जलसा शोहदा-ए-इस्लाम" के 20वें वर्ष का बुधवार को भव्य एवं रूहानी माहौल में शुभारंभ हुआ। दो दशकों से लगातार आयोजित हो रहा यह जलसा क्षेत्र में दीनी, तालीमी और सामाजिक जागरूकता का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ आलिम-ए-दीन मौलाना मोहम्मद उस्मान कासमी ने की। जलसे में जनपद सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में अकीदतमंदों तथा उलेमा-ए-किराम ने शिरकत की।
पहली नशिस्त में मुख्य वक्ता के रूप में मौलाना अब्दुल अली फारूकी ने कुरआन, सीरत-ए-नबी और सहाबा-ए-किराम की शिक्षाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कुरआन इंसानियत के लिए मुकम्मल मार्गदर्शक है और इसकी शिक्षाओं पर अमल कर ही दुनिया और आखिरत में कामयाबी हासिल की जा सकती है। उन्होंने सहाबा-ए-किराम की जीवनशैली को आदर्श बताते हुए कहा कि अल्लाह और उसके रसूल से सच्ची मोहब्बत का तकाजा है कि इंसान उनके बताए हुए रास्ते पर चले। अपने संबोधन में उन्होंने हजरत उमर फारूक (रजि.) के व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता तथा इस्लाम के लिए उनके योगदान का भी उल्लेख किया।
मुहर्रम के महीने के संदर्भ में मौलाना फारूकी ने कहा कि नए इस्लामी वर्ष की शुरुआत आपसी भाईचारे, अमन, खुशहाली और नेक कार्यों के संकल्प के साथ की जानी चाहिए। उन्होंने लोगों से समाज में प्रेम, सद्भाव और इंसानियत के मूल्यों को बढ़ावा देने की अपील की। कार्यक्रम के अंत में मौलाना अब्दुल अली फारूकी ने देश में अमन-चैन, तरक्की, खुशहाली और मानवता की भलाई के लिए विशेष दुआ कराई।
जलसे के सफल आयोजन में जामिया इस्लामिया प्रबंधन समिति, स्थानीय उलेमा तथा स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं कार्यक्रम की लाइव कवरेज और सोशल मीडिया प्रसारण की जिम्मेदारी सोशल मीडिया इंचार्ज अलकमा नोमान ने संभाली, जिसके माध्यम से देश-विदेश में मौजूद लोग भी जलसे की गतिविधियों से जुड़े रहे। जलसे का सिलसिला आगामी सत्रों में भी जारी रहेगा, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले उलेमा-ए-किराम अपने विचार रखेंगे।
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