कृषि भूमि अधिग्रहण की आशंका पर जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या गंभीर, स्थिति की गंभीरता से जिलाधिकारी को कराया अवगत
वाराणसी। राजातालाब तहसील अन्तर्गत करधना से लेकर बरकी तक के 13 गांवों की कृषि भूमि के संभावित अधिग्रहण की आशंका को लेकर क्षेत्र के किसानों और निवासियों में गहरा असंतोष और चिंता का माहौल है। इस अत्यंत संवेदनशील और गंभीर विषय को लेकर सोमवार को प्रख्यात समाजसेवी सुबेदार यादव ने जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या से मुलाकात की। पूनम मौर्या ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत संज्ञान लिया और मौके से ही जिलाधिकारी वाराणसी को इस विषय पर त्वरित और न्यायसंगत कार्रवाई करने हेतु अवगत कराया।
समाजसेवी सुबेदार यादव ने जिला पंचायत अध्यक्ष को सौंपे पत्र में बताया कि करधना, बरकी सहित आस-पास के 13 गांवों के निवासी और किसान पूरी तरह से कृषि पर निर्भर हैं। यदि इन उपजाऊ जमीनों का अधिग्रहण किया जाता है, तो लाखों परिवारों के सामने रोजी-रोटी और आजीविका पर गंभीर समस्या खड़ा हो जाएगा। किसानों का कहना है कि यह सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि हजारों किसानों की जिंदगी और उनके बच्चों का भविष्य है। बिना किसानों की सहमति और उनके हितों की रक्षा किए कोई भी कदम उठाना उनके साथ अन्याय होगा।सुबेदार यादव, समाजसेवी को जिला पंचायत अध्यक्ष ने पूर्ण आश्वासन दिया।
किसानों की पीड़ा और आक्रोश को बेहद गंभीरता से सुनते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या ने उन्हें आश्वस्त किया कि भाजपा सरकार हमेशा किसानों के हितों के साथ खड़ी है। किसी भी अन्नदाता के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तत्काल जिलाधिकारी वाराणसी को पत्र लिखकर व दूरभाष पर अवगत कराया कि इस पूरे मामले की गहनता से समीक्षा की जाए।
किसानों की आशंकाओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।किसी भी स्थिति में किसानों के हितों की अनदेखी न हो।इन गांवों के निवासियों में है भारी सुगबुगाहट संभावित भूमि अधिग्रहण की खबरों से करधना और बरकी समेत कुल 13 गांवों के किसान पिछले कई दिनों से आंदोलनरत और मानसिक तनाव में हैं। समाजसेवी सुबेदार यादव के पहल से जिला पंचायत अध्यक्ष के इस त्वरित हस्तक्षेप के बाद अब किसानों को उम्मीद की किरण दिखाई दी है।
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