किसानों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ समाजसेवी रिंकू रितेश चौरसिया ने खोला मोर्चा
छिंदवाड़ा। जिले का अन्नदाता इस समय खाद के संकट और सरकारी सिस्टम की तानाशाही से बुरी तरह त्रस्त है। वर्तमान में सहकारी सोसायटियों से खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन पोर्टल किसानों के लिए राहत के बजाय आफत बन चुका है। इस गंभीर जन-विरोधी मुद्दे को लेकर क्षेत्र के जाने-माने समाजसेवक रिंकू रितेश चौरसिया ने मजबूत मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने किसानों को इस आर्थिक लूट से बचाने के लिए जिला कलेक्टर के नाम एक तीखा मांग पत्र तैयार किया है, जिसे लेकर क्षेत्र के किसानों में भारी समर्थन देखने को मिल रहा है।
वर्तमान में जिले की सहकारी सोसायटियों से खाद प्राप्त करने के लिए किसानों को ई-टोकन पोर्टल का उपयोग करना अनिवार्य किया गया है। लेकिन इस पोर्टल में एक संवेदनहीन तकनीकी अनिवार्यता जोड़ दी गई है। जो किसान अपनी फसलों के लिए केवल यूरिया लेने सोसायटियों में पहुंच रहे हैं, उन्हें पोर्टल पर जबरन डीएपी और सुपर फास्फेट लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है। जब तक किसान इस अतिरिक्त और महंगे खाद को पोर्टल पर स्वीकार नहीं करता, तब तक सिस्टम उसे यूरिया का टोकन ही जारी नहीं करता।
मामले को प्रखरता से उठाते हुए समाजसेवक रिंकू रितेश चौरसिया ने कहा कि, "छिंदवाड़ा जिले के मक्का उत्पादक किसान बोनी के समय ही अपनी आवश्यकता के अनुसार डी ए पी का छिड़काव कर चुके हैं। फसल के इस वर्तमान चरण में किसानों को सिर्फ और सिर्फ यूरिया की जरूरत है। ऐसे में जबरन थोपे जा रहे महंगे डी ए पी और सुपर फास्फेट किसानों के किसी काम के नहीं हैं। यह सीधे तौर पर किसानों की जेब पर डाका डालने और सोसायटियों का पुराना स्टॉक जबरन किसानों के मत्थे मढ़ने की एक सोची-समझी प्रशासनिक साजिश प्रतीत होती है।"
इस तानाशाही व्यवस्था के खिलाफ समाजसेवक रिंकू रितेश चौरसिया द्वारा तैयार किए गए इस मांग पत्र पर जिले के सैकड़ों पीड़ित किसानों ने अपना आक्रोश दर्ज कराते हुए तेजी से हस्ताक्षर किए हैं। किसानों का यह हस्ताक्षरित पत्र लेकर रिंकू रितेश चौरसिया क्षेत्र के विशाल किसान दल के साथ आगामी मंगलवार को जिला कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में पहुंचेंगे और माननीय कलेक्टर महोदय को सीधे यह पत्र सौंपकर तुरंत न्याय की मांग करेंगे।
अनिवार्य लिंकिंग (टैगिंग) तुरंत खत्म हो: ई-टोकन पोर्टल से यूरिया के साथ अन्य खादों को जबरन लिंक करने की इस व्यवस्था को तत्काल बंद किया जाए। किसानों को उनकी जरूरत के हिसाब से केवल यूरिया का स्वतंत्र टोकन जारी करने के स्पष्ट आदेश दिए जाएं। सोसायटियों में सुबह से लाइन में लगने वाले अन्नदाता को बेवजह परेशान करना और अनावश्यक आर्थिक नुकसान पहुंचाना बंद किया जाए। "यदि आगामी मंगलवार को जनसुनवाई में जिला प्रशासन ने इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेकर ई-टोकन पोर्टल से इस अनिवार्य टैगिंग को तुरंत नहीं हटाया, तो परेशान और आक्रोशित किसान सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।"
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