जायस शरीफ में सजेगी रहमतों की महफ़िल, उर्स-ए-पाक में उमड़ेगा इश्क़-ए-मख़दूम का कारवां
अमेठी। मुहर्रम की 27, 28 व 29 तारीख (13, 14 और 15 जुलाई 2026) को अमेठी का ऐतिहासिक कस्बा जायस शरीफ एक बार फिर इश्क़-ए-औलिया की रूहानी खुशबू से महक उठेगा। सरताज-ए-सिलसिला अशरफिया हज़रत सैय्यद मख़दूम अशरफ सिमनानी किछौछवी रहमतुल्लाह अलैह का मुबारक उर्स-ए-पाक पूरी अकीदत, शानो-शौकत और सूफियाना रिवायत के साथ मनाया जाएगा। देश के कोने-कोने से मुरीदीन और जायरीन का पहुंचना शुरू हो गया है।उर्स-ए-पाक की तमाम रस्में सज्जादानशीन हज़रत मौलाना सैय्यद मेराज अशरफ की सरपरस्ती तथा नायब सज्जादानशीन हज़रत सैय्यद आमिर अशरफ और सैय्यद आसिफ अशरफ की निगरानी में अदा होंगी। पहले दिन महफ़िल-ए-समा, दूसरे दिन कुरआनख़्वानी व महफ़िल-ए-मिलाद शरीफ तथा मुख्य अंतिम दिन संदल, कुल शरीफ, दुआ, महफ़िल-ए-समा, लंगर-ए-आम और तबर्रुकात-ए-औलिया की ज़ियारत के साथ रूहानी रस्में अदा की जाएंगी। पूरी दरगाह "या मख़दूम अशरफ" की सदाओं से गूंज उठेगी।सदियों पुराना यह उर्स केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब, इंसानियत, भाईचारे और मोहब्बत की जीवंत मिसाल है, जहां हर मजहब और हर तबके के लोग एक साथ दुआ और लंगर-ए-आम में शामिल होते हैं। भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, साफ-सफाई और पेयजल सहित सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
सज्जादानशीन हज़रत मौलाना सैय्यद मेराज अशरफ ने तमाम अकीदतमंदों से उर्स-ए-पाक में शिरकत कर हज़रत की बारगाह से रूहानी फैज़ हासिल करने तथा मुल्क में अमन, खुशहाली, भाईचारे और इंसानियत की सलामती के लिए दुआ करने की अपील की है। जायस शरीफ की सरज़मीं एक बार फिर इश्क़-ए-मख़दूम के नूर से जगमगाएगी और उर्स-ए-पाक की रूहानी महफ़िलें हर दिल को मोहब्बत, सुकून और इंसानियत का पैग़ाम देंगी।
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