दूध का पता नहीं, पनीर-खोवा को गोरखधंधा जोरों पर
अमेठी। जनपद मुख्यालय सहित कई बाजारों में इन दिनों नकली पनीर और खोवा की बिक्री बेखौफ होकर चल रही है। सूत्रों के मुताबिक रोजाना 1 से 2 क्विंटल तक डुप्लीकेट पनीर यहां खपाया जा रहा है, लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीम महीनों से नदारद है। स्थानीय दूध विक्रेताओं का कहना है कि पूरे जिले में रोजाना जितना दूध पैदा होता है, उससे इतना पनीर बन ही नहीं सकता। फिर भी बाजार में पनीर की कोई कमी नहीं है। इसकी कीमत भी असली पनीर से 40-50 रुपये किलो कम है। एक विक्रेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ये पनीर स्किम्ड मिल्क पाउडर, यूरिया, डिटर्जेंट और रिफाइंड ऑयल से बनता है। 1 किलो पाउडर से 6-7 किलो पनीर तैयार हो जाता है। लागत 120 रुपये और बिकता है 220 में।जांच में पता चला कि गौरीगंज के आसपास कुछ गोदामों में रात के समय पनीर बनाने का काम होता है। केमिकल वाले पानी में पाउडर घोलकर उसे फाड़ा जाता है और फिर कपड़े में बांधकर पनीर का शेप दिया जाता है। खोवा बनाने के लिए आलू, शकरकंद और सिंथेटिक दूध का इस्तेमाल किया जा रहा है। त्योहार, शादी और भंडारे के सीजन में इसकी डिमांड सबसे ज्यादा होती है। हलवाई भी सस्ता होने के कारण इसे खरीदकर मिठाई में इस्तेमाल कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बाद भी खाद्य सुरक्षा अधिकारी छापा मारने नहीं आते। सवाल उठता है कि क्या इस पूरे खेल में बड़े लोगों का संरक्षण प्राप्त है? स्थानीय समाजसेवी का कहना है, गरीब आदमी 200 रुपये किलो वाला पनीर ही खरीदता है। उसे क्या पता कि वो जहर खा रहा है। बच्चों, बूढ़ों और गर्भवती महिलाओं की सेहत सबसे ज्यादा खतरे में है। एक डॉक्टर ने बताया कि नकली पनीर-खोवा में मिले केमिकल से किडनी फेल, लीवर की बीमारी, फूड पॉइजनिंग और लंबे समय में कैंसर तक हो सकता है। बच्चों में ये सबसे ज्यादा नुकसान करता है। लोगों ने डीएम और खाद्य सुरक्षा विभाग से मांग की है कि तत्काल स्पेशल टीम बनाकर सभी गोदामों और दुकानों पर छापेमारी हो, पकड़े गए माल का लैब टेस्ट हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का सीधा सवाल है, जब सरकार मिलावटखोरों पर बुलडोजर चलाने की बात करती है, तो अमेठी में ये डुप्लीकेट का कारोबार इतना फल-फूल कैसे रहा है।
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