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योगी के बुलडोजर के बीच अमेठी में सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल

योगी के बुलडोजर के बीच अमेठी में सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल

शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं; राजस्व अमले की भूमिका पर उठे सवाल

केएमबी खुर्शीद अहमद
जगदीशपुर अमेठी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां भू-माफियाओं को 24 घंटे में सरकारी जमीन खाली करने की चेतावनी दे रहे हैं, वहीं मुसाफिरखाना तहसील के ग्राम देवकली में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का मामला प्रशासन के दावों को कटघरे में खड़ा कर रहा है। सवाल यह है कि जब जमीन सरकारी है और कब्जे की शिकायतें लगातार पहुंच रही हैं, तो कब्जेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? ग्राम सभा देवकली में गाटा संख्या 629 खलिहान और 630 घूर-गड्ढे की भूमि चकबंदी के बाद से ग्रामीणों के सार्वजनिक उपयोग में रही है। आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में उक्त भूमि के एक हिस्से पर अवैध कब्जा कर लिया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक करीब एक वर्ष पहले भी शिकायत की गई थी, लेकिन तत्कालीन लेखपाल करण द्वारा कथित रूप से गलत रिपोर्ट लगाकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने 28 जुलाई को एसडीएम, 1 अगस्त को तहसील दिवस, 13 अगस्त को जिलाधिकारी तथा 1076 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद हुई राजस्व जांच में कथित तौर पर धीरेन्द्र कुमार पुत्र जगदीश प्रसाद, सूरजभान पुत्र रूपचंद, हरफूल पुत्र जगपाल, रामऔसन पुत्र झूरी, संतलाल पुत्र रामओतर और रामतीर्थ पुत्र रामओतर का कब्जा पाया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि धीरेन्द्र कुमार ग्राम सभा देवकली का निवासी भी नहीं है और करीब एक बीघा सरकारी भूमि पर अकेले कब्जा किए हुए है। इसके बावजूद कब्जा हटाने की कार्रवाई न होने से राजस्व विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है—जब जांच में कब्जे की बात सामने आ रही है तो सरकारी जमीन खाली क्यों नहीं कराई जा रही? क्या भू-माफियाओं के लिए नियम अलग हैं? आम आदमी के खिलाफ बुलडोजर तेजी से चलता है, लेकिन सरकारी खलिहान और घूर-गड्ढे की जमीन पर कथित कब्जा हटाने में प्रशासन की रफ्तार इतनी धीमी क्यों?शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि शिकायत करने के बाद उस पर दबाव बनाया जा रहा है और धमकियां दी जा रही हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बावजूद यदि सरकारी जमीन कब्जामुक्त कराने के लिए शिकायतकर्ता को एसडीएम से लेकर डीएम और 1076 तक लगातार शिकायतें करनी पड़ें और फिर भी जमीन कब्जामुक्त न हो, तो सवाल सिर्फ कब्जेदारों पर नहीं बल्कि उस राजस्व तंत्र पर भी उठेगा, जिसकी जिम्मेदारी ही सरकारी जमीन की हिफाजत करना है।अब देखना यह है कि जिला प्रशासन देवकली की सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराता है या मुख्यमंत्री की भू-माफिया विरोधी मुहिम देवकली की राजस्व फाइलों में ही दम तोड़ देती है।

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