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उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में सिस्टम की बेरुखी से हारा एक 'शिक्षित युवा', राष्ट्रपति से लगाई 'रोजगार, स्वरोजगार या इच्छामृत्यु' की गुहार

उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में सिस्टम की बेरुखी से हारा एक 'शिक्षित युवा', राष्ट्रपति से लगाई 'रोजगार, स्वरोजगार या इच्छामृत्यु' की गुहार

केएमबी खुर्शीद अहमद 
अमेठी। जनपद के जामों ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत राजामऊ के निवासी एक शिक्षित युवा ने देश की राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है। 30 वर्षीय युवक प्रेम अचल ने रोजगार न मिलने और व्यवस्था से निराश होकर इच्छा मृत्यु तक की मांग कर डाली है, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है, प्रेम अचल ने अपने पत्र में लिखा है कि वह पिछले लगभग 10 वर्षों से एसएससी एवं यूपीएसएसएसी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। कई बार फॉर्म भरे, परीक्षाएं दीं, लेकिन कभी भर्ती रद्द हो गई तो कभी बिना कारण परिणाम निरस्त कर दिए गए। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में उनके जीवन के महत्वपूर्ण 10 वर्ष व्यर्थ चले गए, जो किसी भी युवा के लिए सबसे ऊर्जावान समय होता है।
युवक ने सवाल उठाते हुए लिखा कि जब किसी आंदोलन में सरकारी संपत्ति को नुकसान होता है, तो उसे राष्ट्रीय क्षति माना जाता है, लेकिन क्या एक युवा के जीवन के 10 वर्ष बर्बाद होना राष्ट्रीय संपत्ति की हानि नहीं है? उन्होंने स्वयं को देश की “जीवंत संपत्ति” बताते हुए न्याय की मांग की है। पत्र में उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अभाव का भी जिक्र किया है। उनके अनुसार गांव में न तो कोई उद्योग है और न ही निजी क्षेत्र में रोजगार के पर्याप्त अवसर हैं। खेती से इतनी आय नहीं हो पाती कि परिवार का भरण-पोषण हो सके, ऐसे में स्वरोजगार ही एकमात्र विकल्प बचता है, लेकिन वहां भी भ्रष्टाचार आड़े आ रहा है। प्रेम अचल ने बैंकिंग व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने स्वरोजगार के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत ऋण के लिए आवेदन किया, लेकिन बैंक अधिकारियों द्वारा बिना स्पष्ट कारण बताए आवेदन अस्वीकृत कर दिया गया। उन्होंने उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की हरगांव व दखिनवारा शाखाओं का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि पिछले 6 महीनों से उन्हें शाखाओं के चक्कर कटवाए जा रहे हैं और अंततः उनकी फाइल खारिज कर दी गई,उन्होंने अपने पत्र में यह भी लिखा कि इस तरह की व्यवस्था से तंग आकर युवा पीढ़ी नशा, चोरी और आत्महत्या जैसे रास्तों की ओर बढ़ रही है। सामाजिक और मानसिक उत्पीड़न का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लगातार अपमान और असफलताओं ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया है।
प्रेम अचल ने राष्ट्रपति से अपील करते हुए कहा है कि या तो उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाए, या फिर स्वरोजगार के लिए पारदर्शी तरीके से ऋण दिलाया जाए। यदि यह संभव नहीं है, तो उन्हें सम्मानपूर्वक इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदान की जाए। इस पूरे मामले ने प्रशासन और व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाते हैं।

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