होली आ गई लेकिन गांवों से होली लोक गीत धवांरी गायब, गांवों में होली गीत के साथ होली में भूनने के लिए गेहूं की बालियां भी गायब
अमेठी। फाल्गुन का महीना आते ही मन रंगों में सराबोर होने के लिए उतावला होने लगता है । इस बार की होली में आपने नोटिस किया होगा कि गांवों से फाग लोकगीत धवांरी गायब हो गई है । टिकरी निवासी धवांरी गायक रामकुमार पासी बताते हैं कि पहले होली के एक महीने पहले से ही गांवों में धवांरियों की धुन सुनाई देने लगती थी पर अब ऐसा नहीं हो रहा है । जब सवाल किया गया कि आखिर ऐसा क्यों है तो रामकुमार ने बताया कि ग्रामीणों में दिखावे की व्यस्तता देखने को मिल रही है । अब आदमियों के पास समय रहता है तब भी एक दूसरे के पास कोई बैठना नहीं चाहता है । सामूहिक सहयोग की भावना खत्म हो गई है । लोगों के जीवन से संगीत गायब हो रहा है जो कि आने वाले भविष्य के लिए घातक सिद्ध होगा । धवांरी गायक राम बालक प्रजापति बताते हैं कि पहले एक आवाज पर लोग फाग गीत गाने के लिए इकट्ठा हो जाते थे पूरी - पूरी रात फाग गीत गाते - गाते बीत जाती थी लेकिन अब लोग आधुनिकता की दौड़ में डीजे के गानों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं । संगीत गायकों और संगीत साधकों की कमी भी धवांरी गीत बंद होने का एक मुख्य कारण बन रहा है । पहले लोगों का जीवन संगीत से भरा हुआ होता था इसीलिए लोग बीमार भी कम होते थे । संगीत के जीवन से गायब होने पर आधुनिक लोग तनाव,हाइपरटेंशन, बीपी जैसी गंभीर बीमारियों से परेशान हो रहे हैं । भुलैया पुरवा निवासी जगदीश रावत बताते हैं कि इस बार गांवों से केवल होली गीत ही नहीं अपितु होली में भुनने के लिए गेहूं की बालियां भी गायब है मतलब अभी गेहूं कहीं पका नहीं है जो कि होली में भुना जाय । बीते शनिवार को टिकरी गांव के कुम्हारन पुरवा गांव में फाग गीत का आयोजन किया गया । आयोजन में गिरधारी रावत,बाबू लाल प्रजापति,राम सजीवन प्रजापति,राम भारत,शिवलाल,शंकर कश्यप,कमलेश प्रजापति,रघुराज,राजेंद्र आदि लोग शामिल हुए।
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