गौशालाओं को महिला सशक्तिकरण, जैविक खेती एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने का योगी सरकार का मास्टर प्लान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए, योगी सरकार ने गोशालाओं को महिला सशक्तीकरण, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने का मास्टर प्लान लागू किया है। इसके तहत राज्य की 7500 से अधिक गोशालाओं में 'कृषि सखियों' की तैनाती की जा रही है, जो गोशालाओं के संचालन और जैविक खाद बनाने में मुख्य भूमिका निभाएंगी। योगी सरकार के इस मास्टर प्लान की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
कृषि सखियों की तैनाती
प्रदेश की सभी 75 जिलों की गोशालाओं में आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को 'कृषि सखियों' के रूप में तैनात किया जा रहा है। इन्हें मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा, जो जैविक खाद निर्माण, पोषण और प्रबंधन का काम संभालेंगी।
गो-आधारित अर्थव्यवस्था और जैविक खेती
गोशालाओं में इकट्ठा होने वाले गोबर का उपयोग करके बड़े पैमाने पर जैविक खाद (ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर) बनाई जा रही है। इस खाद को स्थानीय किसानों को सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे खेती की लागत कम होगी और जैविक उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा।
आत्मनिर्भर गो-आश्रय स्थल
सरकार ब्लॉक स्तर पर बड़ी गोशालाएं (2000 से 2500 गोवंश की क्षमता वाले) बना रही है, जिन्हें पीपीपी (PPP) मॉडल, एनजीओ और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के माध्यम से चलाया जा रहा है। गोशालाओं को प्राकृतिक खेती, बायोगैस (CBG) निर्माण और गोबर से बने उत्पादों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।
सहभागिता योजना
बेसहारा गायों को पालने के लिए किसानों और जरूरतमंद परिवारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस योजना के तहत गाय पालने वाले किसानों को सरकार द्वारा प्रति गाय के हिसाब से ₹900 से लेकर ₹1500 प्रतिमाह (वित्तीय सहायता) दी जाती है।
कैटल फूड सिक्योरिटी हब
चारा संकट से निपटने के लिए राज्य की गोशालाओं को 'कैटल फूड सिक्योरिटी हब' के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत 'मिशन फॉडर' के जरिए गोशालाओं को स्थानीय किसानों के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा और नेपियर व मोरिंगा जैसे पौष्टिक चारे की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
राज्य सरकार की इन पहलों से जहाँ एक ओर निराश्रित गोवंश को सुरक्षित और स्थायी आश्रय मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और किसानों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
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