नवधा भक्ति करने से मनुष्य का कल्याण संभव- सरोज शास्त्री जी महाराज
तिलोई,अमेठी। क्षेत्र के मिर्ज़ागढ़ मजरे कुकहा में बीते चार दिनों से भागवत कथा चल रही है । कथा के तीसरे दिन पंडित सरोज शास्त्री जी महाराज ने सृष्टि का वर्णन शुकदेव जी परीक्षित जी का मिलन एवं सृष्टि का विस्तार और भक्त ध्रुव की सुनाई। उन्होंने कहा कि मनु शतरूपा से हमारी सृष्टि हुई है। हम सभी को मनुष्य क्यों कहते हैं? क्योंकि हम सभी मनु महाराज की संतान हैं। इसलिए हम सभी को मनुष्य कहा जाता है।आगे मनु जी की तीन कन्याएं आकूती, देवहूती, प्रसूती दो पुत्र प्रियव्रत और उत्तानपाद के बारे में बताया गया। देवहूति का विवाह ऋषि कर्दम जी के साथ हुआ। कर्दम जी के नौ कन्याएं हुई और दसमे नंबर पर भगवान स्वयं कपिल जी के रूप में आई। नो कन्याएं नवधा भक्ति हैं और जब नवधा भक्ति किसी के जीवन में आती हैं तो फिर बाद में भगवान को आना ही पड़ता है। आगे ध्रुव जी की कथा सुनाते हुए कहा ध्रुव जी एक दिन अपने पिता की गोदी में बैठने जा रहे थे, तभी उनकी मौसी ने यह कहकर निकाला कि अगर तुझे राज गद्दी पर बैठना है, तो पहले भगवान की तपस्या कर और भगवान से वरदान मांग कि मेरे गर्भ से जन्म ले फिर तुझे यह राज गद्दी मिलेगी।
ध्रुव रोते-रोते मां के पास आए और कहा की मां मौसी ने मुझे डांटा मां ने समझाया की बेटा मौसी ने सही ही तो कहा है यदि तू भगवान को पा लेगा तो ऐसी गद्दी और गोदी तेरे आगे पीछे रहेंगी। ध्रुव जी जाते हैं और भगवान को प्राप्त करते हैं।इससे शिक्षा यह मिलती है कि अगर कोई हमसे उल्टा भी कुछ कहे पर उसे जो ज्ञानी व्यक्ति होता है। वह उसी बात को बुरे तरीके से ना लेकर के अच्छा समझ करके अच्छी दिशा में मोड़ देते हैं। जैसे ध्रुव कि मां ने ध्रुव जी को भड़काया नहीं की मौसी ने गलत कहा जबकि कहा कि बेटा तेरी मौसी ने सही ही तो कहा है। मौसी को प्रणाम कर के और तपस्या के लिए जाओ। इससे शिक्षा मिलती है कि हमें बुराई में भी अच्छाइयां देख लेनी चाहिए। कथा के मुख्य यजमान आजाद कश्यप के साथ महेश सिंह, भागीरथ रावत, श्री राम प्रजापति, शिव नारायण प्रजापति, ब्रजेश प्रजापति, भूपेंद्र सिंह, हरिकेश सिंह, उमेश कश्यप, सरवन प्रजापति आदि लोग मौजूद रहे।
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