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हल्की बारिश में ढहा निर्माणाधीन नाला, भ्रष्टाचार की खुली पोल, पीले ईंट और डस्ट के इस्तेमाल का आरोप

हल्की बारिश में ढहा निर्माणाधीन नाला, भ्रष्टाचार की खुली पोल, पीले ईंट और डस्ट के इस्तेमाल का आरोप

केएमबी खुर्शीद अहमद
अमेठी। रायबरेली-सुल्तानपुर राजमार्ग के किनारे नगर पालिका जायस द्वारा कराया जा रहा नाला निर्माण कार्य पहली ही बारिश में ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस घटना ने पालिका के विकास कार्यों की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार की पोल खोलकर रख दी है। घटिया निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, राजमार्ग के किनारे बन रहे इस नाले में मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। निर्माण कार्य में लाल पक्की ईंटों की जगह बेहद कमजोर 'पीली ईंटों' का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। इतना ही नहीं, सीमेंट के साथ मिलाए जाने वाले बालू या मौरंग की जगह पूरी तरह से 'डस्ट' (पत्थर के चूरे) का प्रयोग किया जा रहा है। यही वजह रही कि पहली हल्की फुहार पड़ते ही निर्माणाधीन नाला भरभरा कर गिर गया।
सूत्रों का दावा है कि जायस नगर पालिका में विकास कार्यों के टेंडर आवंटन में भी बड़ा खेल चल रहा है। पालिका के लगभग 70 प्रतिशत निर्माण कार्यों का ठेका अकेले 'महाकाल कंस्ट्रक्शन कंपनी' को ही दे दिया जाता है। एक ही कंपनी पर इस कदर मेहरबानी और निगरानी की कमी के कारण ठेकेदार बेखौफ होकर मानक विहीन कार्य करा रहे हैं।
नाला गिरने और घटिया सामग्री के इस्तेमाल का मामला तूल पकड़ते ही प्रशासन हरकत में आ गया है। जायस नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी शैलेंद्र मिश्र ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर ठेकेदार व संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसी जा सके।

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