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स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की बैठक में ई-ऑफिस को पूर्णतः लागू करने के सख्त निर्देश

स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की बैठक में ई-ऑफिस को पूर्णतः लागू करने के सख्त निर्देश

केएमबी संवाददाता
सुलतानपुर 27 अगस्त। जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी, समावेशी तथा जनोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह की अध्यक्षता व मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार सिंह की उपस्थिति में ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज के मल्टीपरपज हॉल, दूबेपुर मे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा हेतु जिला स्वास्थ्य समिति शासी निकाय की बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज सहित स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में मातृ स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य, कम्युनिटी प्रोसेस, परिवार कल्याण, ई-कवच-आभा आईडी, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, क्वालिटी एश्योरेंस, आयुष्मान भारत, संचारी एवं गैर-संचारी रोगों तथा नियमित टीकाकरण सहित विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
 जिलाधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि मुख्य विकास अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, एसडीएम सदर, प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज की एक टीम बनाकर भूमि चिन्हित कर मेडिकल कॉलेज को शिफ्ट करने के सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही करते हुये रिर्पोट प्रस्तुत करें। बैठक में सर्वप्रथम जननी सुरक्षा योजना (जे0एस0वाई0) के अंतर्गत 01 अप्रैल 2026 से 25 अगस्त 2026 तक की प्रगति की समीक्षा की गई। जनपद में कुल 11,094 प्रसव के सापेक्ष 9,418 भुगतान किए जा चुके हैं, जो लगभग 85 प्रतिशत है। ब्लॉकवार समीक्षा में जिलाधिकारी द्वारा 85 प्रतिशत से कम के भुगतान पर नाराजगी व्यक्त करते हुये निर्देशित किया गया कि वे अपने प्रतिशत को सुधारें अन्यथा कार्यवाही की जायेगी तथा सभी शेष लाभार्थियों के भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कराने निर्देशित किया।
 जिलाधिकारी द्वारा 108 एवं 102 एम्बुलेंस सेवाओं की समीक्षा के दौरान पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हुई घटना का जिक्र करते हुये, घटनास्थल पर 8 मिनट में एम्बुलेंस के पहुॅचने पर उसकी सहाहना की। जिलाधिकारी द्वारा उपलब्ध एम्बुलेंस, कॉल रिस्पांस टाइम, मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने तथा रेफरल सेवाओं की स्थिति पर निर्धारित मानक के अनुरूप उपलब्ध कराने पर चर्चा की गई। साथ ही मोबाइल मेडिकल यूनिट द्वारा ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की गई, ताकि जरूरतमंद लोगों को उनके निकट ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। जिलाधिकारी महोदय द्वारा ब्लाक में एमएमयू को बढ़ाने के निर्देश दिये गये।
 बैठक में स्वायत्तशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में संचालित डायलिसिस यूनिट की प्रगति की भी समीक्षा की गई। 13 बेड एवं 13 डायलिसिस मशीनों वाली इकाई में अप्रैल से जुलाई 2026 तक क्रमशः 539, 882, 912 एवं 796 डायलिसिस किए गए। इसी प्रकार पीपीपी मॉडल पर संचालित सीटी स्कैन सेवा में अप्रैल, मई, जून एवं जुलाई 2026 में क्रमशः 1,530, 2,345, 2,489 एवं 1,201 सीटी स्कैन किए जाने की जानकारी दी गई। जिलाधिकारी द्वारा चिकित्सालय में सीटी स्कैन मशीन के खराब होने को लेकर नाराजगी व्यक्त की गयी तथा निर्देशित किया गया कि मशीनों की देख रेख को सही किया जाये व सोशल मीडिया पर वायरल खबर का खण्डन किया जाये। 
  एसएनसीयू (सिक न्यू बार्न केयर यूनिट) की समीक्षा में अप्रैल से अगस्त 2026 तक भर्ती नवजातों की संख्या में वृद्धि की जानकारी दी गई। अगस्त माह में कुल 219 नवजात भर्ती हुए, जिनमें 140 इनबॉर्न तथा 79 आउटबॉर्न थे। इसी अवधि में 179 नवजात डिस्चार्ज हुए। बैठक में नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल, समय से रेफरल तथा उपचार की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
 पी0एम0एस0एम0ए0 के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं की जांच एवं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान की प्रगति की समीक्षा की गई। जनपद में अब तक कुल 26,368 प्रेग्नेंट वूमेन पी0एम0एस0एम0ए तथा ईपीएमएसएमए के अंतर्गत भर्ती हुईं, जिनमें से 22,777 की प्रथम बार जांच की गई तथा 5,204 की हाई रिस्क प्रेग्नेंसी चिन्हित की गईं। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पोर्टल पर लाइन लिस्ट अपडेटिंग की कुल प्रगति लगभग 74 प्रतिशत पाई गई। बैठक में कम प्रगति वाले क्षेत्रों में विशेष ध्यान देते हुए हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समयबद्ध पहचान, फॉलोअप एवं उपचार सुनिश्चित कराने के सम्बन्ध में जिलाधिकारी महोदय द्वारा निर्देश दिए गए तथा करौंदीकला की हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समयबद्ध पहचान, फॉलोअप एवं उपचार में कम प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुये उनको स्पष्टीकरण जारी करने हेतु निर्देशित किया। 
 ब्लड स्टोरेज एवं रक्त उपलब्धता की समीक्षा में बताया गया कि स्वायत्तशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के 600 यूनिट क्षमता वाले ब्लड स्टोरेज में अप्रैल से जुलाई 2026 के मध्य कुल 5,834 यूनिट ब्लड इश्यू किया गया। जिलाधिकारी द्वारा कादीपुर, दोस्तपुर व लम्भुआ में ब्लड स्टोरेज को लेकर नाराजगी व्यक्त की गयी तथा प्रगति को सुधारने हेतु निर्देशित किया गया। जिलाधिकारी द्वारा जनपद के विभिन्न ब्लड स्टोरेज यूनिटों की स्थिति की भी समीक्षा की गई तथा जनपद में विभिन्न स्थानों पर रक्तदान शिविरों के आयोजन को बढ़ाने हेतु निर्देशित किया गया। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के अंतर्गत चिन्हित गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डिप्टी सीएमओ एवं संबंधित एमओआईसी द्वारा 8 गर्भवती महिलाओं के घरों का भ्रमण किया गया। इस दौरान अधिकारियों द्वारा गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों से संवाद कर गर्भावस्था के दौरान संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच, समय से दवा एवं आयरन-फोलिक एसिड का सेवन तथा स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई।
 भ्रमण के दौरान प्रत्येक परिवार को सहजन का पौधा, दवायें आदि उपलब्ध कराया गया तथा सहजन के पोषण संबंधी महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया। अधिकारियों ने बताया कि सहजन की पत्तियां एवं अन्य खाद्य उपयोगी भाग पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जिन्हें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक आहार के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इस पहल का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिवारों में स्थानीय एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करना है। 
जिलाधिकारी द्वारा निर्देशित किया गया कि अब सभी फाइलो को ई-ऑफिस के माध्यम से ही उनको प्रेषित की जायें। बिना ई-ऑफिस के कोई भी फाइल स्वीकार नहीं की जायेगी।
  एनीमिया की रोकथाम एवं उपचार पर विशेष जोर देते हुए जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि एनीमिया को दूर करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाकर उसका नियमित अनुश्रवण किया जाए। गर्भवती महिलाओं, किशोरियों एवं बच्चों में एनीमिया की पहचान के साथ-साथ उनके नियमित फॉलोअप एवं उपचार पर विशेष ध्यान दिया जाए। स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा चिन्हित लाभार्थियों को आवश्यक पोषण संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाए तथा आयरन एवं अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में जागरूक किया जाए। जिलाधिकारी महोदय ने निर्देशित किया कि केवल एनीमिया की जांच तक सीमित न रहते हुए एनीमिक लाभार्थियों की पहचान, उपचार, नियमित फॉलोअप एवं स्वास्थ्य स्थिति में सुधार की प्रभावी निगरानी की जाए। गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार लेने, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन करने तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जा रही आवश्यक सेवाओं का नियमित लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने कहा कि एनीमिया की रोकथाम में परिवार एवं समुदाय की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। इसलिए आशा, आशा संगिनी, एएनएम एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से घर-घर संपर्क कर लोगों को पोषण, संतुलित आहार एवं एनीमिया से बचाव के प्रति जागरूक किया जाए।
  बैठक में कुपोषण की समस्या को दूर करने के संबंध में भी जिलाधिकारी महोदय द्वारा विशेष निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा कुपोषित एवं जोखिम वाले लाभार्थियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। स्वास्थ्य एवं संबंधित विभागों के समन्वय से पोषण संबंधी जागरूकता गतिविधियों को और प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक एवं उपयोगी खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करने के लिए परिवारों को प्रेरित करने पर जोर दिया। इसी क्रम में भ्त्च् गर्भवती महिलाओं के घर जाकर सहजन का पौधा उपलब्ध कराने की पहल को पोषण जागरूकता से जोड़कर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि परिवारों को पौधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ उसके पोषण संबंधी उपयोग की जानकारी भी दी जाए, जिससे इसका वास्तविक लाभ परिवारों तक पहुंच सके। जिलाधिकारी द्वारा आईईसी मद में 10 लोगों की सोशल मीडिया इन्फ्लुएन्सर टीम गठित करने हेतु निर्देशित किया गया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं, उपलब्ध सेवाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों तथा जनहित में किए जा रहे कार्यों की जानकारी सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से व्यापक रूप से प्रचारित की जाए। साथ ही सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों पर प्रसारित होने वाली नकारात्मक एवं भ्रामक खबरों पर नजर रखने तथा तथ्यात्मक रूप से उनका खण्डन करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि सही एवं प्रमाणित जानकारी समय से जनसामान्य तक पहुंचाई जाए, ताकि किसी प्रकार की भ्रांति या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
 गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी महोदय ने 7 दिवस के भीतर चैटबॉट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चौटबॉट के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आवश्यक स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जानकारी समय पर उपलब्ध हो सके तथा उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित उपयोगी जानकारी आसानी से प्राप्त हो।
  जिलाधिकारी ने आशा संगिनी के भुगतान को समय से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में आशा एवं आशा संगिनी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए उनके देयकों एवं भुगतान की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न किया जाए तथा संबंधित अधिकारी नियमित रूप से इसकी समीक्षा करें।
   जिलाधिकारी ने सभी एमओआईसी को अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा सकने वाले नवाचारों के संबंध में सुझाव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं पहुंच में सुधार के लिए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप नए एवं प्रभावी प्रयास किए जाएं। अच्छे नवाचारों को चिन्हित कर उन्हें अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की दिशा में कार्य किया जाए।
 बैठक में जननी सुरक्षा योजना, एम्बुलेंस सेवाओं, एसएनसीयू, पीएमएसएमए, ब्लड स्टोरेज, परिवार कल्याण, ई-कवच, आभा आईडी, नियमित टीकाकरण सहित विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी महोदय ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि कम प्रगति वाले कार्यक्रमों में विशेष सुधार लाते हुए निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि एनीमिया एवं कुपोषण के विरुद्ध प्रभावी एवं निरंतर कार्यवाही की जाए तथा गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को केंद्र में रखते हुए स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की नियमित मॉनीटरिंग की जाए। आशा, एएनएम, आशा संगिनी, एमओआईसी एवं अन्य संबंधित स्वास्थ्य कर्मी आपसी समन्वय से कार्य करते हुए पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाएं।
 बैठक में एन0बी0एस0यू0, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, परिवार कल्याण कार्यक्रम तथा नियमित टीकाकरण की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी महोदय द्वारा ई-कवच एवं आभा आईडी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटल रिकॉर्ड को मजबूत करने तथा पात्र लाभार्थियों का अधिकाधिक पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। 
  जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित सभी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पहुंचाया जाए। विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, नवजात देखभाल, टीकाकरण, एम्बुलेंस सेवाओं तथा रेफरल व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। उन्होंने कम प्रगति वाले कार्यक्रमों एवं इकाइयों की नियमित समीक्षा कर शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा।

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