⚡ ब्रेकिंग News

सरगम- "रात पायल के खनकने की वजह से नववधू नजरें झुका शर्मा गई थी थी मिलन की प्रथम ये वेला पिया से लाज के मारे स्वत: दुहरी हुई थी।।"

सरगम- "रात पायल के खनकने की वजह से 
नववधू नजरें झुका शर्मा गई थी 
थी मिलन की प्रथम ये वेला पिया से 
लाज के मारे स्वत: दुहरी हुई थी।।"

रात पायल के खनकने की वजह से 
नववधू नजरें झुका शर्मा गई थी 
थी मिलन की प्रथम ये वेला पिया से 
लाज के मारे स्वत: दुहरी हुई थी ।।
जीभ तालू से स्वयं जाकर के चिपकी 
और अधरो ने  स्वयं को भींच डाले 
बन गई गठरी सी कोने सेज पर 
और नैनों ने स्वयं को सींच डाले ।।
मन ने माना था पति जिसको,उसी को 
तन ने भी अब मूक आमंत्रण दिया था 
हाथ ठोड़ी पर लगा जैसे उठाया 
सीप सी आंखों ने अवलोकन किया था ।।
ठीक हो जैसे ही पूछा था पिया ने 
सब कुशल है मौन ने उत्तर दिया था ।।
ले लिया आगोश में जैसे पिया ने 
तार वीणा के किसी ने छेड़ डाले 
बज उठी सरगम सी तन और मन में
तोड़ डाले थे सभी तन मन के ताले।।

जा मिले थे अधर उनके ही अधर से 
पल में ही सारा सुधा था चूस डाला 
हो गए मदहोश दोनों कुछ क्षणों में 
ये अधर अब बन गए थे मधुशाला ।।
थी तपिश कुछ इस कदर की क्या कहे अब
लाज पिघले बर्फ जैसे बह रही थी 
हो गया चंचल स्वयं तन और मन था 
तोड़ दो सारी ये सीमा कह रही थी ।।

थी लचकती और खनकती सी सुबह वो 
याद कर कर के वो पिछली वो बातें 
कर रहे थे रात की चुगली अधर अब 
नयन जब तब थे अभी भी बहक जाते ।।
मुस्करा कर देखती थी कनखियों से 
आज मुखड़े पर अलग ही चांदनी थी 
कूकती कोयल सी थी अमराइयों में 
बोल जैसे भैरवी की रागिनी थी ।।

धूप में और प्यास से पागल पथिक को 
जैसे मीठे जल का एक सोता मिला हो 
भूख से रोते हुए बालक को जैसे 
पय भर कर के कोई लोटा मिला हो ।।
राह में चलते हुए भटके पथिक को 
साथ चलने को अब हमराही मिले हो 
प्रिय हमारे संग चलना साथ हरदम 
नदिया से जैसे कोई सागर मिले हो ।।

राजन शर्मा 
दिल्ली

Post a Comment

Previous Post Next Post
BREAKING NEWS : Loading...

ताज़ा खबरें

राजनीति समाचार
राजनीति समाचार लोड हो रहे हैं...