कलियुग में नाम की महिमा अपार, अजामिल और गजेंद्र का हुआ उद्धार- पंडित दिनेश मिश्रा
तिलोई,अमेठी। सिंहपुर विकासखंड अंतर्गत शुकुलन पुरवा मजरे महियासिंदूरिया गांव में बीते पांच दिनों से भागवत कथा चल रही है । कथा के चौथे दिन कथा व्यास पीठ पंडित दिनेश शास्त्री जी महाराज ने प्रभु के नाम की महिमा का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कलियुग में मात्र नाम सुमिरन से भक्तों का कल्याण संभव है। महाकवि गोस्वामी तुलसी दास की पंक्तियों "कलियुग केवल नाम आधारा, सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा" को आधार बनाते हुए बताया कि कान्यकुब्ज ब्राह्मण अजामिल, गणिका और गजेंद्र जैसे जीवों का कल्याण मात्र नाम सुमिरन से हो गया है। इसीलिए मनुष्य को अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। नेक कर्मों से व्यक्ति अपना भाग्य बदलने की भी ताकत रखता है। व्यक्ति के कर्म तभी सही होंगे जब व्यक्ति संत महापुरुषों या फिर सज्जनों की संगति करेगा। अच्छी संगति करने से व्यक्ति के मन, वचन और कर्म में काफी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलते हैं। तत्पश्चात व्यक्ति माया से विदेह जैसा व्यवहार करता है और जब ऐसा होता है तभी वहां परमपिता का वास होता है। परमात्मा का दीदार होने पर व्यक्ति हमेशा आनंदित रहने लगता है।कथा के मुख्य यजमान जगदीश यादव कहते हैं कि भगवान की कथा सुनना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। हमारे साथ-साथ गांव और क्षेत्रवासी भी कथा का समुचित लाभ ले रहे हैं जो कि बड़े पुण्य का काम है। कथा में तहसील तिलोई के वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश सिंह, डॉक्टर संदीप चौरसिया, सोनू सिंह, कन्हैया लाल मौर्य, सदन दीक्षित, उदय भान शुक्ला, हरिशंकर पंडित, शंकर शुक्ला, अशोक यादव आदि लोग शामिल थे।
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