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ओमान में अमेरिकी हमले में देवरिया के युवक की मौत, सिंगापुर की शिपिंग कंपनी के जहाज पर थे इंजन फीटर

ओमान में अमेरिकी हमले में देवरिया के युवक की मौत, सिंगापुर की शिपिंग कंपनी के जहाज पर थे इंजन फीटर

केएमबी शंभू नाथ दुबे
देवरिया के रहने वाले शिवानंद चौरसिया (38) की ओमान में अमेरिकी हमले में मौत हो गई। शिवानंद सिंगापुर की एक शिपिंग कंपनी की नाव पर इंजन फीटर का काम करते थे। शिवानंद करीब सात माह पहले रोजगार के लिए विदेश गए थे। घटना की जानकारी सबसे पहले शिवानंद के छोटे भाई रामप्रवेश चौरसिया को मिली, जो दुबई में नौकरी करते हैं। गुरुवार सुबह उन्होंने मोबाइल फोन के जरिए परिवार को बड़े भाई की मौत की सूचना दी। कुछ ही देर बाद जिला प्रशासन की ओर से भी परिजनों से संपर्क कर घटना की पुष्टि की गई। परिवार के लोगों ने बताया कि शिवानंद रोज घर पर फोन करके बात करते थे। शिवानंद से आखिरी बार 8 जून को बात हुई थी। उस दौरान उन्होंने पत्नी और पिता से करीब 20 मिनट तक फोन पर बातचीत की थी। उन्होंने बताया था कि उनका जहाज ओमान के तट के पास खड़ा है और जल्द ही भारत लौटने वाले हैं।
घर आने की बात सुनकर परिवार बेहद खुश था। बातचीत सामान्य रही और उन्होंने सभी परिजनोंका हालचाल भी लिया था। इसके बाद अचानक उनका मोबाइल बंद हो गया और परिवार का संपर्क टूट गया। अब मौत की खबर मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
शिवानंद चौरसिया परिवार के मुख्य कमानेवाले सदस्य थे। उनके परिवार में पिता रामजी चौरसिया, मां कलावती देवी, पत्नी सुशीला, पांच साल का बेटा राजवीर और दो साल की बेटी वानिका हैं। मौत की खबर के बाद पत्नी सुशीला का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों के अनुसार वह बार-बार बेहोश हो रही हैं। वहीं, दोनों मासूम बच्चों को अभी यह भी समझ नहीं है कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। वृद्ध माता-पिता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। परिजनों का कहना है कि शिवानंद परिवार के बेहतर भविष्य के लिए विदेश में कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे थे। उनकी कमाई से ही घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई चल रही थी।शिवानंद की मौत की खबर मिलते ही सुरौली गांव में मातम पसर गया। दोपहर तक बड़ी संख्या में ग्रामीण और रिश्तेदार उनके घर पहुंचने लगे। तहसील प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने भी परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।अधिकारियों ने बताया कि विदेश में हुई घटना से संबंधित औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। भारतीय दूतावास और संबंधित एजेंसियों के माध्यम से पार्थिव शरीर को भारत लाने के प्रयास जारी हैं। ग्रामीणों ने सरकार से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने की मांग की है। उनका कहना है कि शिवानंद की असमय मौत से परिवार पूरी तरह संकट में आ गया है। परिजनों की मांग है कि जल्द से जल्द पार्थिव शरीर गांव लाया जाए, ताकि पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जा सके।

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