नातिया कलाम और आमद-ए-मुस्तफा के नारों से गूंजा सुल्तानपुर
सुल्तानपुर। यौमे बिलादत-ए-रसूल हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अवसर पर जिले के ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी का आयोजन उत्साह और श्रद्धा के साथ किया गया। विभिन्न स्थानों पर सजावट की गई और जगह-जगह मंच लगाकर अंजुमनों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। जगह-जगह जुलूस निकाला गया और नातिया कलाम एवं आमद-ए-मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नारों से वातावरण गूंज उठा। इस अवसर पर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं और उनके आदर्श जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अल्लाह ने हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को पूरी इंसानियत की रहबरी और मार्गदर्शन के लिए आखिरी नबी और रसूल बनाकर दुनिया में भेजा। उन्होंने अपने आचरण, चरित्र और शिक्षाओं के माध्यम से इंसानियत को सच्चाई, न्याय, भाईचारे, समानता, दया और क्षमा का संदेश दिया।
धर्मगुरुओं ने कहा कि हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दौर में समाज में अनेक बुराइयां व्याप्त थीं।छुआछूत, भेदभाव, दास प्रथा, नशाखोरी, सूदखोरी और बच्चियों को जीवित दफन करने जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ उन्होंने संघर्ष किया और मानव समाज को एक नई दिशा दी। इन बुराइयों को समाप्त करने के लिए उन्हें कठिन परिस्थितियों और लंबे संघर्ष का सामना करना पड़ा। यहां तक कि उन्हें अपना वतन मक्का छोड़कर मदीना की ओर हिजरत करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के उच्च चरित्र, सच्चाई, अमानतदारी, सहनशीलता और क्षमाशीलता से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी शिक्षाओं को अपनाया। उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश इंसानियत, भाईचारे और शांति का था।
धर्मगुरुओं ने मक्का विजय के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उनके साथियों को कष्ट पहुंचाया तथा उनके विरुद्ध अत्याचार किए, उनके सामने जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि वस्ल्लम को पूर्ण शक्ति प्राप्त थी, तब भी उन्होंने बदला लेने के बजाय उन्हें क्षमा कर दिया। यह उनके महान चरित्र और क्षमाशीलता का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि कुरआन में हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को ‘रहमतुल्लिल आलमीन’, अर्थात समस्त संसार के लिए रहमत बताया गया है। उनकी शिक्षाएं किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए शांति, प्रेम, न्याय और सद्भाव का संदेश देती हैं।
जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में देर रात तक जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी की रौनक बनी रही। विभिन्न अंजुमनों ने नातिया कलाम प्रस्तुत किए। आयोजकों की ओर से अंजुमनों का स्वागत किया गया तथा बेहतर प्रस्तुति देने वाली अंजुमनों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रमों में भाग लेकर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत और शिक्षाओं को सुनकर उन्हें अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
Post a Comment