रक्षाबंधन उत्सव में गूंजा राष्ट्रभावना और सामाजिक समरसता का संदेश
देवरिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, देवरिया जिला के तत्वावधान में आयोजित रक्षाबंधन उत्सव का भव्य एवं गरिमामय आयोजन स्व. मोहन सिंह प्रेक्षागृह, टाउन हॉल देवरिया में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य मुकुल कानिटकर का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं प्रार्थना के साथ हुआ। अपने ओजस्वी उद्बोधन में श्री मुकुल कानिटकर ने रक्षाबंधन पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल भाई-बहन के पवित्र स्नेह का प्रतीक नहीं है, बल्कि संपूर्ण समाज को एक सूत्र में बांधने वाला सांस्कृतिक उत्सव है। यह हमें परस्पर सहयोग, कर्तव्यबोध, आत्मीयता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्थापना काल से ही राष्ट्र सेवा, सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण और समाज जागरण के कार्यों में निरंतर सक्रिय है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और एकता का भाव जागृत करना संघ के कार्यों का प्रमुख उद्देश्य है।
इस अवसर पर स्वयंसेवकों एवं परिवारजनों ने एक-दूसरे को रक्षासूत्र बांधकर सामाजिक एकता, भाईचारे और राष्ट्रनिष्ठा का संकल्प लिया। कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह ने संघ के विचारों एवं सेवा कार्यों से प्रेरणा प्राप्त की।
कुछ ईश्वर को मानते कुछ नही मानते हमने कहा सर्वे भवन्तु सुखिन।हमारे विद्वानों ने ये कहा कि किसी भी रस्ते से चलोगे पहुंचोगे वही। अतः हमने विभेद नहीं किया।उन्होंने कहा रक्षा का अर्थ केवल सुरक्षा ही नहीं बल्कि रक्षा के अर्थ परिस्थिति के अनुसार बदला।हमारी संस्कृति में उत्तम कृषि को कहा लेकिन मैकाले की शिक्षा पद्धति ने नौकरी को उत्तम बना दिया जिसे hm अधम कहते थे।हमारे वहां त्याग को ही सर्वोत्तम खा गया।बाल विवाह,रात्रि विवाह आदि का वर्णन खो नहीं मिलता।मनु कहते जिस परिवार में नारी की पूजा होती है वह परिवार देने वाला होता है।यह राष्ट्र देने वाला अर्थात देवताओं का देश कहते है।राम का पूजा करना राम के आदर्श पर चलना राम को फूल चढ़ाना रामर्चन है।रक्षाबंधन राष्ट्र का पर्व है।भाई को बहन रक्षासूत्र बांधकर भाई की रक्षा की शपथ लेती है।रक्षासूत्र किसी व्यक्ति नहीं धर्म की की रक्षा का सूत्र है।सम्मान परिवार का अंग बनने से होता है।रक्षाबंधन समरसता का पर्व है।स्वभाषा,स्वभाषा,स्वसंस्कृति का वरण करने से ही इस राष्ट्र की उन्नति होगी।21 जून 2015 को ही भारत विश्वगुरु बन गया क्योंकि उस दिन 193 देशों के नागरिकों ने योग किया अपने राष्ट्र की वंदना की।
कार्यक्रम में राजधारी विभाग संघचालक,विभाग प्रचारक दीपक ,विभाग कार्यवाह रामप्रवेश,विष्णु गोयल ,वीरेंद्र ,मकसूदन , नगर संघ चालक नमो ,जिला कार्यवाह कृष्प्रताप,नगर कार्यवाह मुकुंद ,नगर सह कार्यवाह अमित कुमार ,दीपेंद्र ,अंकुर,गरिमा,अमन,अवनीश,सरवन केदार जी आदि कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
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