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तिरंगे में लिपटकर घर लौटे वीर हवलदार, पत्नी-बच्चों के क्रंदन से गूंज उठा पूरा गांव, सीआरपीएफ जवान गंगा प्रसाद को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

तिरंगे में लिपटकर घर लौटे वीर हवलदार, पत्नी-बच्चों के क्रंदन से गूंज उठा पूरा गांव, सीआरपीएफ जवान गंगा प्रसाद को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

केएमबी खुर्शीद अहमद
अमेठी। देश सेवा करते-करते सीआरपीएफ के जांबाज हवलदार गंगा प्रसाद आखिरकार तिरंगे में लिपटकर अपने गांव लौटे। शुक्रवार को जैसे ही उनका पार्थिव शरीर सैन्य वाहन से गौरीगंज क्षेत्र के सराय हृदयशाह गांव स्थित आवास पहुंचा, पूरा माहौल गमगीन हो उठा। बेटे, पति और पिता को तिरंगे में लिपटा देख परिवार का दर्द छलक पड़ा और गांव की आंखें भी नम हो गईं। 56 वर्षीय गंगा प्रसाद वर्ष 1992 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे और वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में तैनात थे। बृहस्पतिवार को ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। साथियों ने उन्हें तत्काल सैन्य अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।शुक्रवार को सीआरपीएफ के एसआई जेबी सिंह पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंचे। रामगंज त्रिसुंडी के असिस्टेंट कमांडर अभिषेक यादव समेत अन्य सैन्य अधिकारियों और जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर देकर वीर सपूत को अंतिम सलामी दी। इस मार्मिक दृश्य को देखकर मौजूद हर आंख भर आई।पत्नी राजकुमारी बार-बार बिलखते हुए कहती रहीं— “कोई इन्हें जगा दो, ये सोए हुए हैं...” उनकी चीख-पुकार सुन वहां मौजूद लोगों का कलेजा कांप उठा। बेटियां कर्मा और गायत्री तथा बेटे अजय और विजय पिता की याद में फूट-फूटकर रोते रहे। बेटे अजय ने नम आंखों से बताया कि बुधवार रात पिता से फोन पर बात हुई थी। उन्होंने जल्द घर आने का भरोसा दिया था, लेकिन किसे पता था कि अगली बार वह तिरंगे में लिपटकर लौटेंगे।गांव के लोगों ने अपने वीर सपूत को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। इसके बाद परिजन पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए वाराणसी रवाना हो गए। “देश ने खोया एक वीर जवान, गांव ने खोया अपना बेटा।।”

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