भागवत कथा मौत के भय को दूर कर देती है- प्रेम शरण जी महाराज
तिलोई,अमेठी। बीते तीन दिनों से कुकहा में भागवत कथा चल रही है। सर्वोदय आदर्श इंटर कॉलेज में आयोजित इस कथा का आयोजन शिव मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में किया गया। कथा आयोजक और सर्वोदय इंटर कॉलेज के प्रबंधक जगदंबा प्रसाद तिवारी ने बताया कि बहुत दिनों से मेरी इच्छा थी कि देवाधिदेव भगवान शंकर का एक मंदिर विद्यालय के प्रांगण में बनवाया जाए। आज यह इच्छा पूर्ण हुई और बीते 14 मई को मूर्ति स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा की गई। इसी अवसर पर भागवत कथा का आयोजन किया गया। वहीं अयोध्या से पधारे कथा व्यास पीठ आचार्य प्रेम शरण जी महाराज ने शुक्रवार को तृतीय दिवस की कथा का मर्म समझाते हुए कहा कि भागवत कथा सुनने से मौत का भय दूर हो जाता है। आम आदमी जो हमेशा मौत से डरता रहता है लेकिन आध्यात्मिक आदमी मौत को हंसते हुए गले लगा लेता है। इसके साथ-साथ व्यक्ति की संगति व्यक्ति को काफी आगे तक लेकर जाती है। इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति को संगति अच्छी करनी चाहिए। आज के परिवेश में चारों तरफ तनाव देने वाले व्यक्ति बैठे हैं। टेंशन के शाब्दिक अर्थ को समझाते हुए प्रेम शरण महराज ने बताया कि जब दस सूर्यों के बराबर दिमाग में गर्मी हो जाती है तब तनाव होता है। कभी-कभी तो यह तनाव ही मृत्यु का कारण भी बन जाता है इसीलिए योग मेडिटेशन करते रहना चाहिए। जीवन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कथा व्यास प्रेम शरण महराज ने कहा कि जीवन के दो किनारे हैं एक जन्म और दूसरा मृत्यु। इन्हीं दोनों किनारों के बीच मनुष्य अपना प्रदर्शन करता रहता है जैसे समुद्र के एक किनारे पर खड़े हो जाओ तो दूसरा नहीं दिखता वैसे ही जीवन के एक किनारे पर खड़े होने से दूसरा नहीं दिखता। कथाएं जीवन को सरल और सौम्य बना देती हैं सभी को अपने पड़ोस में होने वाली कथाओं में जाना चाहिए। फिलहाल कथा श्रवण करने राम कृष्ण पाण्डेय, रमेश तिवारी, पंकज साहू, कथा वाचक दिनेश शास्त्री जी महाराज, अर्जुन सिंह भदौरिया, शैलेश साहू, हरिनाम सिंह, रवि दीक्षित, विनीत तिवारी, चंद्र मोहन दीक्षित आदि लोग पहुंचे हुए थे।
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