विश्व पर्यावरण दिवस पर 30 साल पुराने हरे-भरे आम व महुआ के पेड़ों का कत्ल
थाने से लेकर एसपी अमेठी तक पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार, जिम्मेदार मौन
अमेठी। एक ओर पूरे देश में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण के संदेश दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेठी जनपद के जामो क्षेत्र में लगभग 30 वर्ष पुराने हरे-भरे आम और महुआ के पेड़ों को काटे जाने का मामला सामने आया है। इस घटना ने पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों में नाराजगी पैदा कर दी है।पीड़िता के अनुसार, उनकी निजी भूमि पर लगे दो आम और एक महुआ के पेड़ बिना किसी वैधानिक अनुमति के काट दिए गए तथा बाद में उनकी लकड़ी भी उठा ली गई। घटना की सूचना पुलिस को दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 30 वर्ष पुराने फलदार और छायादार पेड़ केवल एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं होते, बल्कि पर्यावरण संतुलन, जैव विविधता और ग्रामीण जीवन के महत्वपूर्ण आधार होते हैं। ऐसे पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचता है।विडंबना यह है कि जिस दिन पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली जा रही है, उसी दिन हरियाली के प्रतीक पेड़ों का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया और जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करने की मांग की है। विश्व पर्यावरण दिवस पर हुई यह घटना पर्यावरण संरक्षण के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करती है।
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